नई दिल्ली, मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम भारतीय क्रिकेट के लिए हमेशा से खास रहा है। सीमित ओवरों के क्रिकेट में यह मैदान टीम इंडिया के लिए मजबूत किला साबित हुआ है। टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में यहां भारत ने लगभग 71% मैच जीतकर अपने घरेलू दबदबे को साबित किया है।
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच टी-20 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेला जाएगा। 5 मार्च को शाम 7 बजे से मुकाबला शुरू होगा। भारत ने इस मैदान पर 71% टी-20 जीते हैं, लेकिन सेमीफाइनल में टीम का रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा। टीम इंडिया ने यहां मल्टिनेशन टूर्नामेंट के 4 सेमीफाइनल खेले और महज 1 जीता।
मुंबई में क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (CCI) का ब्रेबोर्न स्टेडियम हुआ करता था। 1973 में मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) और CCI के बीच होस्टिंग और टिकट को लेकर विवाद खड़ा हुआ। जिसके बाद MCA ने नया स्टेडियम बनाने की ठान ली और 13 महीने के अंदर नया क्रिकेट ग्राउंड बना लिया।
इस मैदान पर भारतीय बल्लेबाजों ने कई यादगार पारियां खेली हैं। पावरप्ले में आक्रामक शुरुआत और डेथ ओवरों में तेज रन बनाने की रणनीति भारत की सफलता की बड़ी वजह रही है। यहां 180+ का स्कोर भी सुरक्षित नहीं माना जाता, लेकिन भारत ने कई बार बड़े लक्ष्य का सफलतापूर्वक बचाव किया है। वानखेड़े में खेले गए बड़े मुकाबलों में भारतीय टीम ने दबाव को अवसर में बदला है। घरेलू दर्शकों का समर्थन खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाता है, जो नतीजों में साफ झलकता है।
जनवरी 1975 में 33 हजार सीटिंग कैपेसिटी वाले वानखेड़े स्टेडियम में पहला इंटरनेशनल मैच भी हो गया। भारत ने वेस्टइंडीज की टेस्ट में मेजबानी की। भारत 201 रन से हारा और 5 मैचों की सीरीज 3-2 से वेस्टइंडीज ने जीत ली। इसी मैदान पर 2011 में भारत ने श्रीलंका को फाइनल हराकर 28 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप का टाइटल जीता। 2013 में यहीं सचिन तेंदुलकर ने अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच भी खेला।
71% जीत दर यह दिखाती है कि वानखेड़े स्टेडियम भारत के लिए टी-20 फॉर्मेट में बेहद सफल मैदान रहा है। आने वाले मुकाबलों में भी यहां टीम इंडिया से मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।


















